इक्कीसवीं सदी की कवयित्रियों की कविता में प्रकृति-संवेदना एवं पर्यावरणीय-चेतना

लेखक

  • Ritika Kushwah Ms. ##default.groups.name.author##

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बीज शब्द - इक्कीसवीं सदी, हिन्दी कवयित्रियाँ, समकालीन हिन्दी कविता, हिन्दी साहित्य, प्रकृति-संवेदना, पर्यावरणीय-चेतना, पारिस्थितिकी, पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति, पारिस्थितिक संतुलन, जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता, स्त्री-दृष्टि, मानव-प्रकृति संबंध, पारिस्थितिक-संकट, पर्यावरणीय-विमर्श इत्यादि ।

सार

सार - इक्कीसवीं सदी में पर्यावरणीय-संकट, जलवायु-परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के निरंतर दोहन तथा लगतर परिवर्तित होती जीवन-शैली ने प्रकृति और पर्यावरण के प्रश्न को साहित्यिक-विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है । इक्कीसवीं सदी की कवयित्रियों ने अपनी कविताओं में इन परिवर्तनों को गूढ़-संवेदना के साथ अभिव्यक्त किया है । इनकी कविताओं में प्रकृति केवल सौंदर्य का विषय मात्र नहीं है; वरन् वह मनुष्य के जीवन, स्मृतियों, संबंधों और अस्तित्व से गहराई से जुड़ी हुई दिखाई देती है । साथ ही उनकी कविताएँ पारिस्थितिक-असंतुलन, पर्यावरण के प्रति बढ़ती मनुष्य की गैर-जिम्मेदाराना मानसिकता और प्रकृति के विनाश पर गंभीर चिंता भी व्यक्त करती हैं । अतः प्रस्तुत शोध-लेख का उद्देश्य इक्कीसवीं सदी की हिन्दी कवयित्रियों की कविता में व्यंजित प्रकृति-संवेदना और पर्यावरणीय-चेतना का विश्लेषण करना है । इस अध्ययन में प्रमुख कवयित्रियों की प्रतिनिधि कविताओं के आधार पर मेरे द्वारा यह समझने का प्रयास किया गया है कि वे प्रकृति को किस दृष्टि से देखती हैं तथा पर्यावरण-संरक्षण और ‘मनुष्य व प्रकृति’ के संतुलित संबंध के प्रति समाज को किस प्रकार जागरूक करती हैं । मेरे द्वारा किए गए इस अध्ययन में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि समकालीन हिन्दी कवयित्रियों की कविता में प्रकृति के प्रति आत्मीय-लगाव और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व-बोध साथ-साथ विकसित होते हैं । इस प्रकार उनकी कविता केवल प्रकृति के सौंदर्य का चित्रण नहीं करती; अपितु वर्तमान पर्यावरणीय-चुनौतियों के प्रति समाज को संवेदनशील बनाने का महत्त्वपूर्ण कार्य भी करती हैं ।

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अपने जैसा जीवन, सविता सिंह, राधाकृष्ण पेपरबैक, नई दिल्ली, पहला संकरण-2023, पृ-16

वही, पृ-61

संदर्भ - एक कसबाई लड़की की डायरी, अनामिका, वाणी प्रकशन, प्रथम संस्करण, 2019, नई दिल्ली, पृ. 43

हरित कविता, संपादक- प्रभाकरन हेब्बार इल्लत, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, प्रथम संस्करण-2022, पृ- 71

सिर्फ कागज़ पर नहीं, रंजना जायसवाल, वाणी प्रकशन, प्रथम संस्करण, 2012, नई दिल्ली, पृ-101

स्वप्न समय, सविता सिंह, राधाकृष्ण पेपरबैक, नई दिल्ली, संकरण-201 3, पृ-37

रश्मि अग्रवाल, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, प्रथम संस्करण-2023, पृ- 18-19

कोलतार के पैर, पल्लवी शर्मा, अंतिका प्रकाशन, गाज़ियाबाद यूपी, प्रथम संस्करण-2022, पृ- 107

प्रीत के नव रंग, प्रीति दुबे, बोधि प्रकाशन, नई दिल्ली, प्रथम संस्करण-2025, पृ- 134

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प्रकाशित

2026-07-25

अंक

खंड

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